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सीबीआई ने PF घोटाला में तीन आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सरकार से मांगी इजाजत, बढ़ेंगी मुश्किलें

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठान यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में भविष्य निधि घोटाले के मामले में सीबीआई ने तीन आईएएस अफसरों समेत 12 लोगों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सरकार से अनुमति मांगी है. इसमें दो आईएएस अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति में हैं और केन्द्र सरकार के विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं. जिन अफसरों के खिलाफ सीबीआई ने अनुमति मांगी है, उसमें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल और ऊर्जा मंत्रालय के सचिव आलोक कुमार हैं. जबकि तीसरी आईएएस अफसर अपर्णा यू राज्य में चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की सचिव के पद पर तैनात है. ये तीनों अफसर पीएफ घोटाले की अवधि के दौरान निगम में तैनात थे और अफसरों के फैसलों के कारण निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में तीन साल पहले ये मामले सामने आया था. जिसमें निगम ने कर्मचारियों की भविष्य निधि को एक कंपनी में निवेश किया था. इस कंपनी डिफाल्ट घोषित कर दी गई थी. वहीं इस मामले में तीन आईएएस अफसरों की भूमिका सामने आई थी. इस मामले में सीबीआई ने जिन तीन आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच शुरू करने के राज्य सरकार से अनुमित मांगी है. इसमें आईएएस अफसर संजय अग्रवाल भी शामिल हैं. संजय अग्रवाल वर्ष 2013 से 2017 तक ऊर्जा निगम के अध्यक्ष और ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में तैनात थे. वहीं 1988 बैच के अधिकारी आलोक कुमार मई 2017 से नवंबर 2019 तक पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष होने के अलावा ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव भी रहे. जबकि 2001 बैच की अधिकारी अपर्णा यू. वह पावर कॉरपोरेशन में प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात थीं. इसके साथ ही सीबीआई ने पावर कॉरपोरेशन के लेखा अधिकारी समेत नौ अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने की अनुमति मांगी है.

सीबीआई आलोक कुमार और अपर्णा यू से कर चुकी है पूछताछ

वहीं इस मामले में सीबीआई आलोक कुमार और अपर्णा से कई घंटों तक पूछताछ कर चुकी है. जबकि ईओडब्ल्यू और सीबीआई ने भी संजय से पूछताछ की है. लिहाजा माना जा रहा है कि इस मामले में जांच के दौरान तीनों के खिलाफ सबूत मिले हैं. जिसके बाद सीबीआई ने राज्य सरकार से इन अफसरों के खिलाफ जांच शुरू करने की अनुमति मांगी है.

DHFCL में किया गया था 4122.70 करोड़ रुपये का निवेश

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दरअसल इन अफसरों के फैसलों के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि और अंशदायी भविष्य निधि के 4122.70 करोड़ रुपए दीवान हाउसिंग फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (डीएचएफसीएल) में निवेश किया गया था. हालांकि बाद में 1854.80 करोड़ वापस लिए गए थे. वहीं मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा डीएचएफसीएल के भुगतान को रोके जाने के बाद 2267.90 करोड़ रुपये निगम के फंस गए थे.

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