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SC ने कहा, विजय माल्या का इंतजार नहीं कर सकते, अवमानना मामले में सजा पर 18 जनवरी को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह हमेशा के लिए विजय माल्या के प्रत्यर्पण का इंतजार नहीं कर सकता. इसी के साथ अवमानना ​​मामले में सजा पर सुनवाई 18 जनवरी को सूचीबद्ध कर दिया गया. दूसरी ओर, सरकार ने अदालत से कहा कि ब्रिटेन में “गोपनीय” कार्यवाही चल रही है. सरकार ने कोर्ट को इस बारे में जानकारी दी. विजय माल्या अपनी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन बकाया मामले में आरोपी है. अब 18 जनवरी को विजय माल्या से जुड़े अवमानना मामले में फैसला सुनाया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने एसजी तुषार मेहता से पूछा कि विजय माल्या के खिलाफ अवमानना मामला यहां पर (अदालत में) है. इसके जवाब में एसजी ने कहा कि अभी मुझे विदेश मंत्रालय से इस संबंध में सूचना मिली है. एसजी ने विदेश मंत्रालय कि ओर से भेजे गए एक पत्र को पीठ के साथ साझा किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में हम इस मामले पर सुनवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय के पत्र में प्रत्यर्पण कि कार्यवाही अंतिम चरण में होने की बात को दर्ज किया. साथ ही यह भी आदेश में दर्ज किया कि गोपनीय सूचना को साझा नहीं किया जा सकता. इस स्थिति में अदालत अवमानना के दोषी माल्या के मामले की सुनवाई 18 जनवरी, 2022 को करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले विजय माल्या को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था. लेकिन वे हाजिर नहीं हुए, इसलिए अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले विजय माल्या की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने कोर्ट के 2017 के फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया था. इस मामले में कोर्ट ने उसे न्यायिक आदेशों का उल्लंघन कर अपने बच्चों को चार करोड़ अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर करने के लिए अवमानना ​​​​का दोषी ठहराया था.

क्या कहा अदालत ने

इस साल 18 जनवरी को केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि सरकार माल्या को ब्रिटेन से प्रत्यर्पित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ कानूनी मुद्दों के कारण इसमें देरी हो रही है. माल्या के खिलाफ अवमानना ​​का मामला मंगलवार को जस्टिस यू. यू. ललित, जस्टिस एस. आर. भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की एक बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. बेंच ने कहा, ‘हम एक आदेश पारित करना चाहते हैं कि हम मामले को सजा पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे क्योंकि (माल्या के) वकील का पेश होना जारी है. इसलिए, सजा पर वकीलों के बयान को सुनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. हम इस पर आगे बढ़ेंगे.’

क्या है पूरा मामला

माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में है. वह अपनी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन चूक मामले में एक आरोपी है. वह स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस द्वारा तामील कराए गए एक प्रत्यर्पण वारंट मामले में जमानत पर है. शीर्ष अदालत ने पिछले साल 2 नवंबर को केंद्र से भारत में माल्या के प्रत्यर्पण पर ब्रिटेन में कानूनी कार्यवाही पर छह सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. केंद्र ने पिछले साल 5 अक्टूबर को शीर्ष अदालत को बताया था कि माल्या को भारत में तब तक प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता जब तक कि ब्रिटेन में एक अलग ‘गुप्त’ कानूनी प्रक्रिया का समाधान नहीं हो जाता, जो ‘न्यायिक और सीक्रेट है.’

केंद्र ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि उसे ब्रिटेन में माल्या के खिलाफ चल रही गुप्त कार्यवाही की जानकारी नहीं है क्योंकि भारत सरकार इस प्रक्रिया में पक्षकार नहीं है. सरकार ने पहले अवमानना ​​मामले में शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि ब्रिटेन में लंबित कानूनी मुद्दा ‘प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बाहर और अलग’ है और ‘गोपनीय है और इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है.’ शीर्ष अदालत ने अक्टूबर, 2020 में माल्या के वकील से कहा था कि वह पिछले साल 2 नवंबर तक शीर्ष अदालत को अवगत कराएं कि उसके प्रत्यर्पण को लेकर किस तरह की ‘गुप्त’ कार्यवाही चल रही है.

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