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चन्नी सरकार ने नहीं मानी सिद्धू की सिफारिश, जाखड़ ने कसा तंज- आपके बंदर, आपकी सर्कस, मेरा किसी के ‘शो’ में हस्तक्षेप नहीं

पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नवजोत सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के संगठन बनाने को लेकर एक कहावत के जरिए उनपर निशाना साधा है.  जाखड़ ने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘आपके बंदर, आपकी सर्कस’, मैं इस कहावत को फॉलो करता हूं. मैंने न किसी को कुछ सुझाव दिया है और न ही दूसरे के ‘शो’ में हस्तक्षेप किया है.जाखड़ का यह ट्वीट उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया है, जिनमें कहा गया कि नवजोत सिद्धू ने संगठन बनाते वक्त जाखड़ की सलाह नहीं ली जाखड़ के कहने के मुताबिक प्रधान या अन्य ओहदेदार नियुक्त नहीं किए. जिसके बाद जाखड़ ने साफ किया कि वह पंजाब कांग्रेस में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे. उसमें क्या करना है, वह नवजोत सिद्धू ही जानें.

दरअसल करीब एक महीना पहले सिद्धू ने अपनी नाराजगी कम करते हुए पंजाब कांग्रेस के दफ्तर पहुंचकर कामकाज संभाल लिया था. नवजोत सिंह सिद्धू ने जिला अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की एक लिस्ट तैयार की थी जिसे पिछले 12 दिन से पार्टी हाईकमान चरणजीत सिंह चन्नी की अनुमति नहीं मिली है.सिद्धू ने सिफारिश तैयार करते वक्त अधिकतर विधायकों और पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ की सलाह नहीं ली. ऐसा दावा किया जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने लिस्ट में अपने ही लोगों को जगह दी है इसलिए कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू की इस लिस्ट को अब तक स्वीकार नहीं किया है.

ट्वीट को लेकर चर्चा में जाखड़

जाखड़ लगातार ट्वीट को लेकर चर्चा में रहते हैं. जाखड़ ने दो दिन पहले कहा था कि पंजाब में राजनीति ड्रामा हो गई है, जो बिल्कुल क्रिप्टो करंसी की तरह है. जो बिकती खूब है, लेकिन विश्वसनीय नहीं है. उनका यह ट्वीट सिद्धू से जोड़कर देखा गया. इससे पहले वह समझौते के लिए केदारनाथ गए सिद्धू और CM चरणजीत चन्नी को राजनीतिक तीर्थयात्री बता चुके हैं. जाखड़ ज्यादातर इशारों में कांग्रेस नेताओं पर ही हमला करते रहते हैं.

सिद्धू ने ट्वीट पर सवाल उठाए तो शायरी से दिया था जवाब

कुछ दिन पहले नवजोत सिद्धू ने कहा कि आजकल पुराने प्रधान खूब ट्वीट करते हैं. कभी उन्होंने मेरी तरह मुद्दे उठाए हैं. जाखड़ ने सिद्धू के बयान का यह हिस्सा ट्वीट किया. जिसमें उन्होंने लिखा कि ‘बुत हमको कहे काफिर, अल्लाह की मर्जी है, सूरज में लगे धब्बा, फितरत के करिश्में हैं. बरकत जो नहीं होती, नीयत की खराबी है.’ हालांकि इसके बाद सिद्धू ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया.

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