अन्य खबर

पीएनबी ने “अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस” ​​मनाया

तकनीकी उपकरण - पीएनबी प्राइड-सीआरएमडी मॉड्यूल (अपने दिव्यांग कर्मचारियों के लिए) का शुभारंभ

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने पीएनबी प्राइड-सीआरएमडी मॉड्यूल टूल लॉन्च करके अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस (आईडीपीडी) अनुपम तरीके से मनाया। यह तकनीकी उपकरण एक एंड्रॉइड-आधारित एप्लिकेशन कस्टम है -जिसे विशेष रूप से विकलांग पीएनबी कर्मचारियों के लिए विशेष उल्लेख खाता (एसएमए) उधारकर्ताओं की निगरानी और प्रभावी ढंग से अनुवर्ती कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है। यह टूल IOS के साथ भी बहुत जल्द सुसंगत(कम्पेटिबल) होगा।एसएमए खाते शीघ्र पहचाने जाने वाले दबावग्रस्त ऋण होते हैं, जो बैंकों को समय पर उपचारात्मक कार्रवाई शुरू करने में सक्षम बनाते हैं और ऐसे उधारकर्ताओं को एनपीए में जाने से रोकते हैं।पीएनबी प्राइड मॉड्यूल में बिल्ट-इन टॉक बैक सॉफ्टवेयर है जो दृष्टिबाधितों को स्वतंत्र रूप से सिस्टम को एक्सेस करने की अनुमति देता है और उन्हें केवल अपने फोन पर टैप करके ग्राहकों से संपर्क करने में सक्षम बनाता है। यह एक गेम-चेंजर पहल है जो कर्मचारियों को दबावग्रस्त संपत्तियों की जल्द पहचान करने और सुधारात्मक उपाय शुरू करने में सशक्त बनाता है।ऐप का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देना है। यह प्लेटफॉर्म दृष्टि या अन्य शारीरिक अक्षमताओं वाले ‘पीएनबी वारियर्स’ के लिए अवसरों के नए द्वार खोलता है, जिससे उन्हें एक महत्वपूर्ण और मूर्त योगदान करने में मदद मिलती है। सुहास लालिनाकेरे यथिराज- आईएएस जिला मजिस्ट्रेट, गौतम बुद्ध नगर (यूपी) तथा पैरालिंपिक 2021 टोक्यो, जापान में एसएल -4 श्रेणी में रजत पदक विजेता (बैडमिंटन) ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित रहे। प्रधान कार्यालय, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में बैंक के संपूर्ण उच्च प्रबंधन ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। इसके अलावा, देश भर में फैले/स्थित सभी अंचल/मंडल कार्यालयों और दिव्यांग स्टाफ सदस्यों (लगभग 2300 संख्या में) ने वर्चुअल रूप से समारोह में भाग लिया। बैंक के कई विकलांग कर्मचारियों को विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।दिल्ली में बैंक के प्रधान कार्यालय में पीएनबी परिवार को संबोधित करते हुए, समारोह के मुख्य अतिथि श्री सुहास एल वाई ने अपने साहस की गाथा साझा की, जिसने उन्हें अपने पेशेवर करियर में ही नहीं बल्कि खेल और खेल की दुनिया में भी जीत दिलाई। उन्होंने कहा, “हमें यह समझने के लिए नम्रता की आवश्यकता है कि सफलता हमेशा कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति को ही नहीं मिलती है, बल्कि उसे भी मिलती हैं जिसको जीवन में मिलने वाले अवसर का भी आशीर्वाद होता है और उसका भाग्य भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टोक्यो में उस एक घंटे में मेरा प्रदर्शन वास्तव में मायने रखता है, वह नहीं जो मैंने अपने पूरे जीवन में किया।” सीएच. एस. एस. मल्लिकार्जुन राव, एमडी एवं सीईओ, पीएनबी ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा, “जिस तरह से हम उपलब्ध असाधारण प्रतिभा का उपयोग करने में सक्षम हैं, वह आज एक महत्वपूर्ण कारक है। कई बार हम रूप और अनुभव के आधार पर प्रतिभा का आंकलन करते हैं, जो कभी-कभी गलत होता है। आंतरिक गुणवत्ता में कोई बाधा नहीं है और यह दिल और दिमाग की प्रतिबद्धता से आता है और उन दोनों के एक साथ काम करने के साथ, कोई भी शारीरिक अक्षमता या अन्यथा सफलता प्राप्त करने के लिए एक आसन्न कारक नहीं हो सकता है। प्रतिबद्धता और जुनून के बिना उत्कृष्टता हासिल करना एक सामान्य व्यक्ति के लिए भी असंभव है।” श्री सुहास एलवाई का उदाहरण देते हुए, उन्होंने आगे कहा कि “यह ध्यान देने योग्य है कि प्रतिबद्धता व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों मोर्चों पर किसी व्यक्ति के लिए कैसे ख्याति प्रदान कर सकती है।”न केवल नौकरशाही के रूप में इतनी कुशलता से अपनी भूमिका निभाने की, अपितु कड़ी मेहनत के साथ ओलंपिक में सफलता प्राप्त करने की कल्पना करना भी मुश्किल है। यह स्पष्ट रूप से न केवल उनके(श्री सुहास) बल्कि संपूर्ण देश के लिए ख्याति प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।पीएनबी प्राइड- सीआरएमडी मॉड्यूल पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने कहा, “आज डिजिटलीकरण के साथ, ग्राहकों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए और दिव्यांग कर्मचारियों की सेवाओं के उपयोग के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता पैदा करने और उन्हें ग्राहकों के साथ जोड़ने, से बैंकिंग बदल गई है। पीएनबी द्वारा प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर की गई यह पहल प्रशंसनीय है और बेहतर ग्राहक जुड़ाव बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।पीएनबी के कार्यपालक निदेशक  विजय दुबे ने पीएनबी योद्धाओं की अवधारणा और पीएनबी प्राइड के कार्यान्वयन में दिव्यांग स्टाफ सदस्यों की क्षमताओं और उनके कौशल के उपयोग पर जोर दिया और कहा, “पीएनबी प्राइड सीआरएमडी मॉड्यूल का विकास एक सहभागी मॉडल के माध्यम से हुआ था और विकलांग कर्मचारियों से प्राप्त फीडबैक को मॉड्यूल में शामिल किया गया था- सीआरएमडी मॉड्यूल विशेष रूप से हमारे दृष्टिबाधित कर्मचारियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विकसित किया गया है ताकि वे सुविधा के साथ काम करने में सक्षम हों और व्यापार तथा ऋण की वसूली में योगदान करते रहें।”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button